3) प्रलयकाल
सभी ओर अंधेरा छा गया था l मानवता खत्म हो रही थी l एक ही अनुवंश के संकर से बने लोग एक दुजे का गला काट रहे थे l चन रूपये, पैसे , जवाहरात के लालच में एक दुजे के खून के प्यासे बन गये थे l वे अब रो रहे थे l सूरज देवता का सफेद प्रकाश सिकुड गया था l और आकाश की अंधियारे में उसने विचित्र चुल्हे के निखारों की भाती रंग इक्तियार लियां था l जिस प्रकार चुल्हे के निखारे बुझते वक्त दधकते है l उस प्रकार सूरज की लालिमा दिख रही थी l झूठ का सहारा लेकरं कमाई गई संपत्ती के बारे में सोचकर अनेक लोग रो रहे थे l अंधियारा कब हटेगा l उसके बारे में पूछ पूछ कर वैज्ञानिको को हर बार फोन करके सता रहे थे l वह उन्हे कहते की हमारा सबकुछ ले लो l हमारे लिये एक ऐसा यान बनावो जो सुरज की गुरुत्व के बाहर होणेवाली वसुंधरा के माफिक दुजा ग्रह हो वहा पर हमे छोड आये l ताके हम दुजा जीवन जी सके l ये सुरज अब कामका नहीं रहा l कब फुटे और हमे निगल जाये पता नाही l कृपा करो सोना लो चांदी लो लेकीन हमे बचालो l सभी ओर अंधियारा छा गया है l फुल, पौधे तो क्या सभी वृक्ष, लता अब बुरे हालत मे जा चुके हैं l
सृष्टी की सभी बर्फ पिघल चुकी है l उसके कारण सागर का जलस्तर इतना बड गया है की उस कारण सागर समीप होनवाले बडे शहर कब के जलमग्न हो गये है l इस कारण वहा रहणे वाली जनता इधर उधर का आसरा धुंडती हुई घुम रही है l लेकीन झुठी संस्कृती की चादर ओढे हुवे लोग उन्हे आसरा देणे से मुह फेर रहे है l झूठ की राह पर चलने वाले लोग आखों से आसू बहाकर अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं l वहा सच्चाई के राह पर चलने वाले लोग हस कर भगवान को प्यार और शांती की गुहार लगा रहे हैं l सृष्टी की हालत नर्क से बत्तर हो गई है l सूरज आसमान में आग् बबुला होणे से सागर के पानी की जलद ही भाप होकर पासवाले खंड पर जोर से बारिश गिरा रही हैं l जिसकी एक एक बूँद मुसल की भाती लग रही हैं l
लोगो ने कूछ सालों में इकठ्ठा किया हुवा अनाज ही उनकी उदर निर्वाह का साधन बन गया था l
भारत वर्ष के एक गाव मे एक छोटासा बारह वर्ष का लडका रहता है l उसका नाम शंभू है l वह अपने घर से बाहर आकर देखकर फिर अंदर जाता है l और अपने मां से पूंछता है l की यह बारिश कब रुकेगी l और अच्छी तरह उजाला कब दिखेगा l
तभी उसकी माँ बोली, “ भगवान हमसे रुठ गया है l”
तब वह बोला, “ क्यो रूठ गया है l में तो हर दिन उसकी मुरत पुजता हुं l”
“ वह तूमसे ही नहीं, पुरी सृष्टी बरबाद करणे वाले हर एक से रुठ गया है l जिनको बुध्दी की देन उसने दी l वही अब सृष्टी को नर्क की आग मे धदकते हुवे छोडे है l इसलिये यह प्रलयकाल आया है l इसमे जो अच्छा है वही तरेगा l बुरा डुब मरेगा l
“ लेकीन मां यह अच्छा बुरा क्या हैं? हम कैस पहचाने उन्हे?”
माँ बोली, “ जो सच्चा हैं l नेक हैं l अच्छे कर्म करता है l दान धर्म करता है l प्यार बाटता हैं l विनम्र है l वही अच्छा है l”
“ अब वह बाते छोड और यह ज्वार का डिब्बा ले l जा और चक्की से आटा बनाके ला l जो रात दिन पिसने का काम कर रही है l”
अपनी मां के कहे बोल उसकी कानो में गुंज रहे थे l उसने ज्वार का डब्बा लिया और वह चक्की की तरफ चला गया l जाते वक्त बारिश से बचने हेतू उसने एक छाता लिया ज्वार का डिब्बा अपने सिरपर रखकर उसपर छाता खोले हुवे अपने नन्हे हातों से उसे संभालते हुवे वह चक्की में आया l अपना डिब्बा चक्की के कठडे पर रखकर वह एक कोने मे जाकर खडा हूवा l और इधर उधर देखणे लगा l
वहा पर आई हुई औरते आपस में बतीया कर रही थी l
एक बोली, “ क्या करें, कल किसने देखा है l जो भी दिन मिले हैं वह भगवान के नाम में लगाउंगी l कुछ भी कहो, थोडे बहुत हुवे जाने अनजाने हुवे पाप धुल जायेंगे l”
दुसरी बोली, “ हाय राम! कैसा यह काल आया हैं l हमारी जान लेकरं ही छोडेगा l में ने तो अभी जवानी के हसी पल भी नहीं देखे l “
थोडी देर बाद अपना आटे का डिब्बा डब्बा लेकरं वह अपने घर की तरफ जाने निकला l तो सडक के एक कोने में एक खैराती नल के पानी पर अपने बर्तन लेकरं धोणे के लिये एक मुस्लिम युवती आई थी l उसने शंभू के हात मे आटे का डिब्बा देखा तो वह बोली, “ क्या आटा बनाने गये थे क्या?”
शंभू बोला, “ हा, क्यो?”
वह युवती बोली, “ कुछ नहीं , मुझे भी थोडा दे दो न, मेरी अम्मा बहुत बिमार है l घर में अनाज का दाना तक नहीं l दो रोटी का ही सही, दे दो न आटा l”
“ ना बाबा ना, मै न दू आटा, तुम्हे आटा देकर हम क्या भुके रहे l उस पर तुम हो एक मुसलमान, में न दू? मैने सूना है l तुम बुरे हो l गाय काटकर खाते हो?
“ अलाह कसम? मैने तो आज् तक गाय का मास एक बार भी नहीं खाया l हमारे घर में दो वक्त की रोटी के लाले है l और मास कहा से लाये? कभी कबार बकरी ईद को मिला था l वो भी प्रसाद स्वरुप l मैने नहीं खाया l दया करके दे दो न दो रोटी का आटा?”
उसके कहे पर ध्यान न देकर वह उसे झूठा कहकर अपने घर आया l और अपनी मां को आटा दे दिया l मां ने आटा गुणकर चुला फुंका और आटे की रोटिया बनाने लगी l शंभू को बडी भूक लगी थी l तो वह छोटीशी ताटली लेकरं चूले के पास आकर बैठ गया l और मां को रोटीया शेकते हुवे देखने लगा l
थोडे ही देर में मां ने आटे की रोटी बनाकर उसकी ताटली मे डाल दी l और थोडीशी चटणी भी डाल दी l शंभू ने एक निवाला तोडा और अपने मूह में डालने लगा l तो उसके सामने उस मुस्लिम युवती की छबी उभर आई l उसे बहुत ही बुरा लगा l उसका उदास और याचक की तरह दिखनेवाला चेहरा उसके सामने आ गया l वह खाना खाना छोड के उठा उसने वह रोटी और माने बनाई दुसरी रोटी भी ले ली और अपने कमीज मे छिपा ली l वह घर से बाहर की तरफ भागा l मां पीछे से बोली, “ शंभू किधर जा रहे हो l खाना तो खाके जावो l बाहर बारिश हो रही थी l शंभू भिगते हुवे ही चक्की के पास होणे वाले मकान के पास पहुंचा l वहा चक्की के पास होणेवाले औरतों से उसने उस मुस्लिम युवती के बारे मे पूंछा l और उनके बताये हुवे मकान मे वह घुस गया l उसने देखा की एक औरत चार पाई पर लेटी हुई है l और वहा पर बंद चुले के पास बैठी हुई हैं l वह उदास है l घर में इधर उधर उसने देखा l घर में खाणे के लिये कुछ नहीं है l उसने अपने कमीज के अंदर रखी हुई रोटिया निकाली और उसे दे दी l उसके आंखो से आसु छलक रहे थे l उसने शंभू को भिगा हुवा देखा और टॉवेल लेकरं उसके गिले बाल पोंछने के लिये बढी l
तो शंभू बोला, “मुझे जाना है l मां राह देख रही हैं l मैं कल रोटी लेके आऊंगा यह कहकर वह घर से बाहर निकला l
वह जब बाहर आया l उसने देखा की एक बडी कतार में हिंदू साधूओ का जथा वहा से गुजर रहा है l वह लोग परमेश्वर का नाम लेते हुवे जा रहे हैं l और उससे क्षमा मांग रहे हैं l वह गुजरे नहीं तो थोडी देर में और एक जुलूस शंभू ने देखा l बडे दाढीवाले फकीर वहा से गुजर रहे है l उन्होंने कंबल ओढ रखा था l वह शिसक रहे थे l और कह रहे थे l ‘हे परवर दिगार हमे माफ कर दो l’ शंभू को बडा ही अचरज हुवा l की ये लोग इस तरह किधर जा रहे है l वह उनके पीछे गाव की एक छोर तक चला गया l गाव की सीमा पर होनेवाले मंदीर से एक तेज दिव्य रोशनी दिखाई दे रही थी l उसके सामने कूछ लोग साफ किये हुवे नारियल फोड रहे है l उसने आगे जाकर देखा l तो मंदीर के गर्भगृह की भगवान की मुरत तूट गई है l और उससे वही तेज रोशनी निकल रही है l जो उसने थोडी देर पहले देखी थी l वह रोशनी उत्तर दिशा की तरफ जा रही थी l वह सब देखकर उसे अचरज हुवा l उसे अब घर की याद आई l वह पीछे मुडा l और घर की तरफ जाणे लगा l बारिश जोर से हो रही थी l वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी l रास्ते में बहुत कीचड हो गया था l उसमें चलने के कारण पाव मैले हो गये थे l वह घर की तरफ जाणे लगा l तभी उसे चर्च की घंटा सुनाई दी l वह उधर मुडा l और चर्च की तरफ चलता गया l रास्ते में उसे एक कब्रगाह लगी l वहा से आगे वह चर्च की तरफ चला गया l वो चर्च के अंदर गया l वहा भी उसे मंदीर की तरह दिव्य रोशनी दिखाई दी l वहा चर्च मे एक सफेद कपडा पहणे हुवे एक पाद्री थे l उसके गले में एक क्रॉस का लॉकेट था l वह रो रहे थे l उनकी आँखो से आसू गिर रहे थे l उन्होंने जब शंभू की तरफ देखा l की एक नन्हा सा लडका चर्च में आया है l तब उन्होंने गौर से देखा l और वह बोले, “ ए लडके चला जा यहा से, कुछ देर बाद सबकुछ नष्ट होणे वाला है l देख उधर वह पवित्र किताब जल रही है l थोडी देर मे यहा से दिव्य शक्ती जाणेवाली है l उसके बाद वह कब्रगाह से गढे मुर्दे उठणे लगेंगेl उनमें से कूछ बुरे है l वह तुम्हे जकड ना ले l जल्दी भाग जा अपने मां के पास, वही तेरे लिये सबसे सुरक्षीत जगह है l क्यो की प्रभू की माता पर बहुत कृपा है l क्यो की वही ही बस प्रभू का कार्य कर रही है l जा चला जा l वह बाते सूनते ही वह वहा से भागने लगा l
भागते हुवे उसने देखा की कब्रगाह में गढे़ मुर्दो के उपर् की मिठ्ठी हिल रही है l और उनमे से आवाज निकल रही है l कूछ चिल्ला रहे है l ‘ इन्साफ करो, इन्साफ करो ‘ तो कूछ शिसक शिसक कर रो रहे थे l और हमे माफ करो ऐसा कह रहे है l तो कूछ गुस्से से चिल्ला रहे है l शंभू डर गया l और अपने घर के तरफ भागा l अपने घर जाते वक्त वह घर के पीछे होणेवाले रास्ते से गया l घर के पीछे जब वह पहुंचा l तब उसने देखा l की घर के पीछे होनवाले नारीयल के पेड के नीचे बहुत सारे नारीयल गिर गये है l पेड पर चडा हुवा एक आदमी नीचें उतर आया l और शंभू की मां से बोला, “ दीदी काम हो गया l मै अभी चलता हुं l”
माँ ने शंभू की तरफ देखा वह मुस्कुराई, और उसे बोली, “ चलो घर में जल्दी बारिश के कारण कितना भीग गये हो l खाना भी नहीं खाया l”
शंभू को अचरज हुवा वो की मांने उसे क्यो नहीं डाटा l क्यो की वह मां को बिना पुंछे घर से बाहर गया था l शंभू को मां घर में लेकरं आई l उसको टॉवेल लेकरं वह पोंछने लगी l बादमें उसने उसे खाना खाणे को बिठाया l
उसने खाना खाते वक्त अपने मां से पूंछा की इतने सारे नारियल उसने बरबाद क्यो किये?
तो मां बोली, “ मैने कहा बरबाद कीये, वह तो मैने शिवजी को रिहा कर दिया है l”
“ वो कैसे” शंभू ने पूंछा l
“ कैसे मतलब l शिवजी ने जन कल्याण हेतू नरियल के फल रूप अपना कार्य किया l तो अब अगली सृष्टी के चयन हेतुं मैने नारियल के फल काटकर मुक्त किया l
माँ की बाते उसकी समज में नहीं आ रही थी l उसने खाना खाया l और सभी बर्तन उठा के रसोई घर के कोने मे रख दिये l और मां के पास जाकर बैठ गया l अचानक धरती हिलने लगी l घर के छप्पर उडणे लगे l शंभू डर गया l अपनी मां से जाकर लिपट गया l मां ने उसे अपने आचल में छिपा लीयां l मां के मुख से शिव नाम निकलने लगा l वह भी शिव शिव कहने लगा l थोडे ही देर में जल जला आया l और पानी का बडा बहावं आया l सभी लोग उसमें बहणे लगे l नाक - मुहं में पानी चला गया l सभी ओर लोगो के चिल्लाने की आवाजे आने लगी l शंभू अपनी ममां को चीपक गया था l वह पानी में मां के साथ बहने लगा l सभी ओर पानी ही पानी हो गया l जमीन कब की पानी मे समा गई l इधर उधर चिल्लाने की आवजे आने लगी l शंभू तैरने की कोशिश करने लगा l
लेकीन वह तैर नहीं पा रहा था l इतने में उसे हलका हलका महसुस होणे लगा l थोडी देर में उसे एक लकडी का तुकडा मिला l उसपर वह बैठ गया l उसने इधर उधर देखा l तो कई लोग डुबकर मरे हुवे है l उनके शव पानी में तैर रहे थे l इतने में उसने एक शव देखा l वह हुबहू उसके जैसा था l उसने फिर आस पास देखा l कई लोग पानी के उपर चलते हुवे जा रहे थे l थोडी देर में एक समुद्री बेट जैसा कूछ दिखाई दिया l वाहा पर तेज रोशनी थी l वह वाहा चला गया l वाहा पर उसने देखा की वही चर्च का पाद्री खडा है l वह शंभू को देखकर् बोला, “ तुम भी आ गये l चलो आजावो मेरे पास बैठ जावो”
शंभु ने इन्कार किया l और वह अपने उस लकडी पर बैठकर आगे निकल गया l तब उसे आगे नर्क सी जगह दिखाई दी l वाहा पर एक आदमी नींचे गिरे गिडगिडाता दिखाई दिया l उसने गौर से देखा l तो वह जॉन था l जो चोरी करता था l जीसे बहुत से किडे नोचकर खा रहे थे l वह घबरा कर फिर पानी की तरफ चला गया l और अपने लकडी पर जाकर बैठ गया l और आगे निकल गया l थोडी देर मे उसे आगे दुसरा बेट दिखाई दिया l वाहा पर कई मुसलमान उसे एक पेड को बंधे हुवे मिले l वो रो रहे थे l उन्हे एक आदमी कोडे लगा रहा था l उसके आगे जब वह गया तो उसने देखा l उसके घर के नजदीक रहणेवाले अब्दुल चाचा जिसकी चार बिबिया थी l जो अपने पहली बिबी को छोड चूका था l जो बिमार थी l उस अब्दुल चाचा के पैर मे अंगार बीछे हुवे है l वह घबरा गया और आगे दौडता गया l तब उसने देखा की वहा पर एक बाग है l वहा सुंदर झरने के पास वही मुस्लिम युवती बैठी हुई है l जिसके पैरो में फुल बिखरे हुवे है l जिनसे महक आ रही थी l
वह उस युवती की तरफ गया l उसने पुंछा की तुम यहा क्या कर रही हो l तुम्हारी मां कहा हैं?”
वह बोली, “ क्या कर रही हो याने, मै तो मर कर कहा जाउँगी l अलाह के पास मे ही न l”
वह बोला, “ क्या तुम मर गई हो?”
“ हा मै मर गई हुं l मैने मेरी माँ की सेवा की इसलीये अलाहने मेरे पैर मे फुल बिछाये है l”
शंभू बोला, “ तुमने ऐसा क्या काम किया है l तुम तो गरीब हो l तो ऐसा क्या काम तूमने किया?”
वह बोली, “ मै हर रोज नदी पर जाकर लोगो के मैले कपडे धोती थी l जो भी रोटी मुझे मिलती उसमे से थोडी मै खाती l थोडी अपनी अम्मा को खिलाती l और एक तुकडा हमारे गली के भुके कुत्ते को खिलाती l इसलिये अलाह ने मेरे पैरो में फुलो की चादर बिछाई है l और कहा आवो नेक बंदी तुम्हारा जन्नत में स्वागत है l”
शंभु बोला, “ अब तुम यही रहोगी घर नहीं जाओगी l”
“ कैसा घर? कोणसा घर? वह तो पूरी तरह से जलजले में बरबाद हो गया l अब वह जमीन नष्ट हो चुकी है l वहा अब बुराई की खान हो गई थी l इसलीये परम ईश्वर अल्लाह ने उसे मिटा दिया है l अलाह हमे अब दुजी जमीन पर भेजेगा l हमारा पाप पुण्य देखकर अलाह हमे दुजे सुरज मंडल में होनेवाले सूरज के पास होनेवाली वसुधापर जो उसने बनाई है l उधर देख वहा उबलती हुई कढाई में पक रहा हैं l वही कासिम जो मुझे बेचने ले जा रहा था l आज तक कितनी लडकियों को उसने बुरे काम में लगाया l उसकी हालत देख l और वह करीम मीया जिसने कितने निर्दोष लोगो को मारा l अब उसे जिंदा करके गिधो द्वारा नोचने की सजा दिलायी है l देखा क्या हालत हो गई है उनकी l
शंभू बोला, “ तो क्या मेरी भी हालत वैसी ही होगी l”
“ ना, तुम तो मासूम हो l तुम से जाणे अनजाने में भी कोई पाप नहीं हुंवा होगा l तो कैसे सजा मिलेगी l” वह बोली.
तभीं वह प्रेषित आये l उन्होंने बिना शिलाया सफेद रंग का कपडा पहना था l वह बोले, “ आवो बच्चे मेरे पास आवो l तुम ने बडा ही नेक काम किया है l”
शंभू डर गया l
“ अरे डर मत, देख वह उजाला पवित्र परम आत्मा का, यही अलाह है l जो तुझे पहले भी दिखाई दिया है l तुम्हारी मां तुम्हारे हातों से भुके लोगो को खाना भिजवाती थी l तुमने भी भूकी रुबिणा को खाना दिया था l बोल क्या चाहिए तुमको?"
शंभू बोला, “ मुझे मेरी मां चाहिए l”
तब प्रेषित हसकर बोले, “ठीक है l में तुम्हारी राह देखता हुं l” और उन्होंने अपना हात उठाया l वह बोले, “चलो मै तुम्हे राह दिखाता हुं l”
उनके हात से तेज रोशनी निकली l उससे एक दिव्य ज्योत निकली l वह चमकने लगी l
प्रेषित बोले “ जावो इस ज्योती के संग, वह तुम्हारे मंजिल तक पहुंचा देगी l”
शंभु उस ज्योती की राह पर चलता गया l वह ज्योती उसे एक जगह पर ले गई l वहा पर एक बर्फ के जैसा पहाड था l उसके नीचे स्वर्ग से सुंदर हरियाली देख रही थी l वहा एक बडी चट्टान पर बैठे व्याघ्र चर्म, रुद्राक्ष धारण कीये हुवे त्रिनेत्र धारी तेजस्वी शिव शंकर दिखाई दिये l वह उनके नजदीक चला गया l तभी शिव शंकरजी ने उसे गोदी मे उठाया l और प्यार से कहा, “ सत्य की राह पर चलने वालों का जीवन सुंदर ही होता है l जावो वहा पर दिव्य शिवलिंग के पास तूम्हारी अम्मा वहा पर बैठी है l
वहा पर जाओ l उससे मिलो l मै तुम दोनो को अगले पडावं को भेज दुंगा l वह भागते हुवे गया l वहा पर उसके जान पहाचान वाले थे l कूछ को तो वह जानता भी नही था l लेकीन जब मां से मिला तब वह फुलो नहीं समाया l वह अपने मां के पास गया l उसे लिपटकर रोने लगा l मां ने उसके आसू पोंछे l उसे प्यार किया l उसे गोदी मे बिठाया l थोडी देर बाद उन्हे दुसरे पाडाव पर ले जाणे के लिये एक गण आया l वो उन को वहा से ले गया l शंभू उसके साथ जाणे लगा l जाते वक्त उसने पीछे देखा l सभी और अवकाश की पोकली है l वहा पर एक दिव्य रोशनी है l उसके जरिये अलग अलग जगह प्रकाश की रेखा जा रही है l वहा पर भगवान् के अलग अलग रुप दिख रहे हैं l अब उसे लगणे लगा , की कोई धर्म, मजहब नहीं है l यह तो परमेश्वर का खेल है l और हम उसकी शतरंज के प्यादे l वह जैसा नचाना चाहेगा वैसा सब कूछ चलेगा l सिर्फ कर्म पर हमारे निर्भर सब है l उसने नीचे देखा अब वहा पानी ही नहीं था l वहा पर अवकाश और अनेक तारे दिखाई देने लगे l वह हलका महसुस करने लगा l
गण ने उसे अवकाश के एक ओर लाकर उसके शिर्ष पर रुद्र रखा l और वह मंत्र पठण करने लगा l तो शंभू एक स्मृतिभस्म दिव्य ज्योती में परावर्तीत हुवा l उसके बाद उसने उसे किसी ओरा सूर्य मंडल की वसुधा पर अपना कर्म करने के लिये भेज दिया l
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