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Thursday, April 18, 2024

६)साहस

 ६) साहस


६)साहस
सौमीत्र


सौमीत्र एक होनहार लडका था l उसके पीताजी एक उद्योजक थे l उनकी शहर के बाजार मे बडी कपडो की दुकान थी l कारोबार मे अच्छा जम बैठने के कारण उनकी आर्थिक स्थिती अच्छी थी l सौमित्र के दादाजी फौज में थे l वह फौजी होणे के कारण उनका ब्याह नहीं जम रहा था l बहुत प्रयास के कारण उस जमाने मे उनकी शादी हुई थी l उसके दादा और दादी जब साथ में खडे रहते l तो ऐसा लगता की नारीयल के पेड के पास छोटा आम् का पेड खडा हो l इस कारण उनके बच्चो में यह अनुवंशिकता दिखती थी l सौमित्र के पिताजी अपने मां के जैसे खुजे हो गये थे l और उसके पिताजी की बहने अपने पिता की तरह लंबी बनी थी l सौमित्र के पिताजीं नाटे होणे के कारण वह फौज मे भरती हो ना सकते थे l इस कारण दादाजी की इच्छा पुरी ना हो सकी l लेकीन दिमाग में तेज होणे के कारण एक अच्छे व्यावसायिक हो गये थे l दादीजी के खुजे होणे के कारण दादीजी की सास् हमेशा ताने मारती थी l लेकीन दादाजी उसवक्त हमेशा दादीजी की तरफदारी करते l क्यो की दादीजी एक अच्छी जीवन संगिनी है l दादाजी बाहर दहाडते शेर की तरह थे l उनकी मुच्छे देखकर आस पास के छोटे बच्चे भी डर जाते l औरते तो सर पर पल्लू का घुंगट ओढ के सामने आती थी l लेकीन दादीजी नाटी होणे के बावजुद उनका आवाज बाळासाहेब ठाकरे के मफिक करार था l उनके आवाज से घर के सभी भयकंपित होते थे l क्यो की वह सक्त मिजाज की थी l सौमित्र की अम्मा और पापा भी उनसे डरती थी l दादी के बिना घर का पत्ता भी नहीं हिलता था l

दादाजी की जो इच्छा जो अपने बेटे से थी l वो जो पूरी ना हो पाई थी l वह अब पोते से पूरी होणे की आशा थी l सौमित्र को अपने जैसा फौजी बनाने की उन्होंने ठाणी थी l वह बचपन से ही उसके पीछे हात धोकर पडे थे l वह हर दिन उसे सवेरे उठते l उससे कसरत करवाते l दौड लगवाते l उसे तैराणे के लिये ले जाते l उन्होंने उसे फटाफट बनाने की ठाणी l सौमित्र को दादाजी पर गुस्सा आता था l उसके आसपास के बच्चे हमेशा देर से उठते l टिव्ही देखते l खेल कुद अपने मन के माफीक करते l लेकीन दादाजी तो उसे फौजी बनाने के लिये कसरत करवाने के पीछे पडे थे l वह सोचता की उसके पिताजी का बंगला है l गाडी है l कारोबार है l लेकीन दादाजी के सीर में क्यो ए फौजी बनवाने की ख्वाईश है l

दादाजी के इस रवये से वह तंग आ गया था l अब वो बडा हो रहा था l और आठवी कक्षा मे भी गया था l स्कूल के लडके उसकी तबीयत देखकर उसे फौजी कहकर चिडाते थे l

सौमित्र के पिताजी ने अब अपना कपडों का व्यवसाय बढाया था l अलग अलग जगह पर उन्होंने अपने दुकान खोले थे l उस कारण उनके तरक्की के चर्चे सभी ओर गुंजने लगे l सौमित्र अब बडा हो रहा था l आठवी कक्षा मे जाणे के कारण वह अब अकेला स्कूल जाणे लगा था l रोज की तरह सौमित्र स्कूल गया था l दोपहर हो गई l लघु छुट्टि हो गई l बच्चे बाहर मेदान में उछल कुद करने के लिये चले गये l सौमित्र भी चला गया l मैदान के एक छोर पर होनेवाले खाद्य पदार्थ के ठेले के पास वह चला गया l उसने वहापर चन रुपयों की शेकी हुई मुंगफलीयां ली l और पास होनेवाले कट्टे पर जाकर बैठ गया l और मुंगफलीयां खाने लगा l इतने में एक इसम वहा पर आया l उसने अपने आँखो पर गॉगल लगाया था l सौमित्र को अकेला पाकर वह नजदीक आया l

वह बोला, “ अरे, सौमित तुम्हारे पिताजी का अक्सीडेंट हो गया है l चलो जलदी तुम्हे बुलाया है l देखो वह कार उनके मित्र ने भेजी है l सौमित्र को यह सुनकर धक्का सा लगा l क्रोध की वह अपने पिताजी से बहुत प्यार करता था l उसके हातों से मुंगफलीया गिर पडी l सौमित्र कूछ सोचे बिना उस आदमी के साथ गाडी में बैठ गया l उस गाडी मे और दो लोग थे l वह सौमित्र को देखकर् मुस्कुराये l गाडी चल पडी l सौमित्र ने उस इसम को पुंछा की उन्हे कहा ले गये है l

वह बोला, “अरे, सौमित्र उन्हे जिल्हा सिटी हॉस्पीटल मे रखा है l”

 सौमित्र अब रोने लगा l गाडी चलती रही l थोडी दैर बाद सौमित्र के ध्यान में आया, की वह गलत रास्ते जा रहे है l क्यो की दादाजी ने उसे सारा शहर घुमाया था l वह भी पैदल चलकर l इस कारण सौमित्र को सब शहर की ठिकाणे याद थी l

सौमित्र बोला, “ अरे भाई तुम गलत रास्ते जा रहे हो l यह रास्ता तो शहर के बाहर जाता है l”

तब उसमें से एक ने पीछे मुडकर करारी नजर से देखा l तो सौमित्र के मन में शंका आ गई l वह बोला, “ यह गलत रास्ता है l मुझे यहापर उतार दो l में अपने आप चला जाऊंगा l”

६)साहस
अपहरण


तब आगे की सिटवाला आदमी पीछे मुडा l और उसने एक रामपुरी सुरा निकाला l उसे देख कर सौमित्र डर गया l तभी उसके पास वाले ने उसके हात पकडे और सौमित्र चिल्लाणे से पहले उसके मुंह मे एक कपडा ठुसा दिया l और उसे नीचे की तरफ ढकेला l और एक रुमाल उसके नाक पर रखी l सौमित्र बेहोश होने लगा l उस मे से एक बोला की यह लडका तो सब रास्ते जानता है l उसे सुला दो l” सौमित्र समज गया l की यह लोग उसका अपहरण कर रहे है l और उसके पिताजी को कूछ नही हुवा है l

इधर स्कूल की घंटी हो गई l और सभी बच्चे अपने अपने कक्षा मे जा चुके थे l सौमित्र को उनके साथ जाते हुवे किसिने भी नहीं देखा था l सब बच्चों को लगा की तासिका चुकाने हेतू वह कही छिपा होगा l इधर गाडी ने तेज रफ्तार पकड ली l वह अब छोटा रोड छोडकर महामार्ग पर आ गई l गाडी के हादरे से और नशा जादा न चढणे के कारण सौमित्र को होश आ गया l लेकीन सर बहुत दर्द कर रहा था l लेकीन उसने चुपचाप से लेटा रहणा ही ठीक समजा l अब उन अपहरण कर्तावों की भाषा बदल चुकी थी l वे अब भोजपुरी में बाते करने लगे l थोडी देर बाद वह गाडी सूनसान झाडी की तरफ जाणे लगी l थोडी ही देर में वह गाडी जंगली एरिया मे घुस गई l वहा पर जंगल से नजदीक एक फार्म हाऊस था l वहा पर वह गाडी घरी गई l वाहा पहुंचने के बाद उन्होंने सौमित्र को उठाकर फॉर्म हाऊस के पीछे के रास्ते से उसे ले जाकर एक कमरे मे पटक दिया l अब सौमित्र को लगा की अब यहा से बचना मुश्किल होगा l वाहा पर और दो आदमी थे l वह राह ही देख रहे थे l सौमित्र को एक कमरे मे बंद करके वह कामयाबी का जश्न मनाने दुसरे कमरे मे चले गये l वाहा पर जाकर वे शराब पिणे लगे l सौमित्र को उनकी सभी बाते सुनाई दे रही थी l उनकी बाते सुनकर सौमित्र ने जाना की यह लोग उसका अपहरण करके उसके पिताजी से पच्चास लाख रुपये की वे फिरोती मांगणे वाले है l उन मे से एक ने किसी को फोन किया और सभी जाणकारी दे दी l बाद में कूछ देर बाद उनमें से दो वहा पर रह गये l और तिन बाहर चले गये l गाडी जाणे की आवाज सनाई दी l वह थोडा डर गया l उसके मन मे अनेक प्रश्न उमटणे लगे l उसने कई बार अखबारों मे पढा था l और टिव्ही पर भी समाचार मे देखा था l की अगर इन अपहरण कर्तावों की मांग पूरी नहीं की तो जिसका अपहरण किया है l उसे मारकर कही एकांत जगह पर फेक देते हैं l यह सोचकर वह डर गया l डर के मारे उसको पासिना आने लगा l इतने मे कमरे का दरवाजा धाड से खुला और एक आदमी अंदर आया l उसने सौमित्र के मुह की पट्टी खोली और एक पकोडा सौमित्र के मूंह मे ठूस दिया l उसने किसी तरह से वह खाया l उसे हीचकिया आणे लगी l तब उसने थोडे पाणी की मांग की,तब उस आदमी ने थोडा पानी पिलाया l और अंदर धकेलकर वह दरवाजा बंद करके चला गया l उस आदमी के मुह से शराब और बिडी की बास आ रही थी l

इधर सौमित्र स्कूल से नहीं आने पर उसके घरवाल चिंतित हो उठे l उन्होंने आस पडोस और स्कूल तथा उसके दोस्तों से पूछताज की, लेकीन कूछ पता नहीं चला l तब वह पुलिस स्टेशन जाणे के लिये तयार हुवे l तभी घर में मोबाइल की रिंग बजने लगी l तब सौमित्र की मां ने कॉल रिसिव्ह किया l तब उस ओर से किडन्यापर बोला, “ देखो तुम्हारा बच्चा हमारे कब्जे मे है l अगर उसकी खैरियत चाहते हो तो पचास लाख रुपये तयार रखणा l अगर थाने मे रपट लिखाई या किसी से कूछ कहा l तो याद रखणा l बच्चा नहीं उसका सिर् मिलेगा l”

फोन बंद हो गया l सौमित्र की मां उसकी बाते सुनकर फूट फुटकर रोने लगी l उसने वह बाते अपने पती और ससुर को बताई l सभी को चिंता होणे लगी l तब दादाजी ने उन्हे भरोसा दिलाया l

दुसरे दिन फिर उसका फोन आया l तब दादाजी ने फोन उठाया l उससे वह बाते करने लगे l और बोले हम अपने बच्चे की आवाज सूने बिना कैसे जान ले की वह हमारा बच्चा है l तब उसने कमरे से घसिटते हुवे फोन के पास ले आया l उसके हात में फोन देकर बोलणे को कहा l, जब दादाजी ने सौमित्र की आवाज सुनी l तब वह बोले, “मेरे शिकाये गये पर गौर करो l डरो मत तुम, साहस जुटावो, मै कूछ करता हुं l”

तभ् उस अपहरण कर्ता ने फोन छिन् लिया और वह बोला की बच्चे की सलामती के लिये कल श्याम तक हनुमान टेकडी के घने जंगल मे लाल रंग का धागा बांधे हुवे बरगद के पेड के नीचे रुपये की बॅग रख आणा l अगर होशियारी की तो बच्चे के तुकडे दुसरी बॅग मे मिलेंगे l उसने फोन रखा l

सौमित्र के पापा रुपये का इंतजाम करने में लगे थे l लेकीन रक्कम बहुत बडी थी l इतना रुपये का इन्तजाम करना कोई साधारण बात नही थी l

इधर जब से दादाजी से बाते हुई l तब से दादाजी ने कहे लब्ज सौमित्र के कान मे गुंजने लगे l जब वह कमरा बंद करके बाहर गये l तब सौमित्र ने थोडी देर ध्यान किया l उसने दादाजी जो शिकाते थे वह याद किया l उस कारण उसके दिमाग से वह डर निकल गया l और उसकी मती स्थिर और शांत हो गई l उसके बाद उसका दिमाग गाडी के पहियों जैसा घुमणे लगा l उसके दिमाग में विधायक विचारों की श्रृंखला खडी होने लगी l उसने अपहरण की बाद की घटनाओं को याद किया l तब उसके दिमाग में भाग जाने का खयाल आने लगा l उसे अपने चौथी कक्षा का छत्रपती शिवाजी महाराज का पाठ याद आया l की छत्रपती शिवाजी महाराज औरंगजेब की कैद से कैसे छुटे थे l उसे प्रेरणा मिली l थंडे दिमाग से वह योजना बनाने लगा l

उसने उनकी हरकत देखी थी l रात के वक्त यह लोग शराब मे तर्र होते है l और कमरे की तरफ नही आते l तो रात को ही वह यहा से भागेगा l उसने पुरे कमरे का जायजा लिया तब उसे ध्यान में आया की बाथरूम की व्यवस्था में एक काच की खिडकी है l वहा से आसानी से वह जा सकता है l

रात का खाना देने के बाद वह लोग कमरा बंद करके चले गये l थोडी देर मे वह शराब पिकर् तर्र हुए l सौमित्र ने अपने आप को रस्सी से किसी तरह छुडा लिया l और अपने मुह से वह कपडा निकाला l और जोर की सास ली l उसके बाद अपने पैर के शूज के लेस अच्छी तरह से बांधे l और उसने दादाजी ने पढाये हुवे उपक्रम को याद किया l दादाजी ने बिना पैर की आवाज किये कैसे चलना है वह सिखाया था l वह बाथरूम की तरफ गया l बाथरूम का दरवाजा धीरे से खोला l बाथरूम मे जाणे के बाद उसने दरवाजा बंद किया l और बाथरूम के खिडकी के नये बनाये उपर नीचे करने वाले काच निकाल कर राख दिये l उसने बाहर झाका तो उसे बाथरूम का पाईप दिखाई दिया l उसने पूरी पाईप का जायजा लिया l उपर से नीचे तक कैसे जा सकता है यह जाच लिया l चांद के प्रकाश में उसने वहा से उतरणे का सोचा l और वह खिडकी से बाहर निकला और पाईप को पकडकर बंदर जैसा चढना और उतरना जो दादाजी ने सिखाया था उस प्रकार से वह पाईप से नीचे उतरा l और पैर का आवाज किये बिना वह कूछ दूर गया l और वाहा से फिर भागकर कूछ अंतर चला गया l अंधेरे के कारण कूछ दिखाई नहीं दे रहा था l थोडी देर चलने के बाद उसे दादाजी की बाते याद आई l उन्होंने कहा था, की जब हम अकेले होते है l तब हमे आस पास के वस्तूवों का इस्तेमाल करना चाहिए l और हमारा रास्ता हमे ही बनाना चाहिए l अंधेरे मे चलना बडा ही कठीण हो रहा था l तब उसके हात मे घडी थी l जो रोशनी दे सकती थी l जिसमे लाईट थी l उसने उसका प्रकाश ऑन किया l और वह चल पडा l जाते वक्त उसके दिमाग में विचार आया l की जब इन लोगो को मै भागा हुं l यह पता चलेगा l तब वे मेरी तलाश करेंगे तब वह मुझे सिधे रास्ते धुंडेगे l अब क्या करें? इतने में उसे अपने चौथी कक्षा का पाठ याद आया l की छत्रपती शिवाजी महाराज औरंगजेब बादशहा के चंगुल से कैसे छुटे l तब उसने सोचा की सिधे रस्ते नही तेढे रस्ते जाना होगा l तब वह जंगल की तरफ मुडा और जंगल मे घुस गया l अब उसने ध्यान से चलना शुरू किया l बारीकी से देखकर वह अंधेरे मे सतर्कतता से वह चलने लगा था l थोडी थोडी चांद की रोशनी से अब दिखाई देणे लगा l

तो उसने अब आकाश की तरफ देखा l तब दादाजी ने ग्रह, तारो के बारे में जो पढाया था l वह उसे याद आया l उसने उस से दिशाओ के बारे मे जाचा l और उसे वह अपहरण कर्ता किस दिशासे लेकरं आये l यह अंदाज लगाया l और अपना मार्ग तय किया l अब वह नौ बजे से लेकरं लगातार पांच घंटे चल रहा था l उसे थोडी थकान लग रही थी l इसलिये उसने आराम करने की सोची l और उसने एक पेड को अच्छी तरह से जांचा l और उसपर वह चढ गया l और उसके बडे खोड पर बैठ गया l अपने हात की घडी में अलार्म एक घंटे का लगाया l और वह सो गया l एक घंटे बाद उसकी जब घडी अलार्म करने लगी l तब उसकी निंद खुली l घडी मे रात के तीन बजे थे l अब वह थोडा फ्रेश हो गया था l अब फिर से उतरकर उसने चलना सुरू किया l जंगल के उपरी क्षेत्र में वह पहाडी पर चला गया l तब तक सवेरा होने का समय हो चला था l पुराब की ओर प्रभा होने लगी थी lवहा पर जातेवक्त उसे लगातार चलने से बहुत भूक लगी थी l इसलिए उसने इधर उधर देखा l की शिशिर ऋत के कारण बहुत सारे पेडो के पत्ते गिर गये थे l कूछ पेडो पर नये पत्ते और बहर आने लगे थे l उसके ध्यान में आया l की दादाजी उसे हर दिन रात के समय कूछ ना कूछ पढने को जबरन बिठाते थे l एक दिन जंगली पेडो के बारे मे लिखी किताब उन्होंने पढणे को दी थी l उसमे हर एक पेड की जाणकारी और उसके बारे मे लिखा था l वह उसने पढा था l तो उसने निरीक्षण किया l और कूछ पेड के पत्ते निकाले और वह खा गया l उसके बाद उसने जंगली नाले का पानी पिया l और आगे निकल वह पहाडी पर आया l भगवान की दया से अब तक का सफर अच्छा हुवा था l पहाडी पर खडे होकर, उसने वहा से सभी ओर देखा , तो दूर एक जगह उसे धुवां उठता दिखाई दिया l उसने स्कूल मे पढा था l की जहाँ पर धुवां होता है, वही विस्तव याने आग होती है l और आग जहा वहा पर मनुष्य यह सोचकर उसने फिर बारिकी से देखा, और वहा पर बस्ती होने का अंदाज लगाया और वह उस दिशा की ओर चलता गया l

६)साहस


 थोडी देर बाद वह उस धुवे की जगह तक पहुंचा l जो घने जंगली इलाके मे बसा हुवा था l उस इलाके मे एक आदमी गावं के नजदीक दिखाई दिया l तब सौमित्र ने वहा के बारे मे उससे पूछताज की तब उसे यह पता चला की वह रहणेवाला शहर यहा से पच्चास किलो मिटर दूर है l तब सौमित्र ने पूछा यहा पर नजदीक का शहर कोणसा है l तब उस आदमी ने नजदीक वाले बडे गाव के बारे मे बताया l उसने सौमित्र के बारे मे पूछताज करने की कोशिश की लेकीन सावधानी के लिये सौमित्र ने वह कॅम्प के लिये आया था l और रास्ता चूक गया है l येसा कहकर वह आगे गावं के नजदीक गया l तब उसे गावं से नीचें बडे रास्ते की तरफ जाणेवाला रास्ता मिल गया l वह उस रस्ते से चल पडा l आगे एक नुकड पर एक मंदिर दिखाई दिया l वह वहा पर चला गया l वहा एक शिव मंदीर था l वाहा पर जाकर उसने शिवलिंग को प्रणाम किया l शिवलिंग को देखकर उसे दिशा का ज्ञान हुवा l वह आगे बड गया l इधर उधर के निशाण देखते हुवे वह आगे बढता रहा l

इधर उन अपहरण कर्तावो की नशा उतर गई थी l सवेरा होकर बहुत देर हो गई थी l सूरज की रोशनी से वह जाग गये l उसमे से एक सौमित्र को देखने आया l उसने देखा की सौमित्र वाहा पर नहीं है l उसने फिर बाथरूम मे जाकर देखा l फिर वह जोर से चिल्लाया l उसने अपने साथियों को हाक दी l आवाज सुनकर उसके साथी अंदर रूम मे चले आये l जब सौमित्र भाग गया है l यह जब पता चला तब वह इधर उधर धुंडणे लगे l पुरा फार्म हाऊस धुंद l उसके बाद वह गाडी लेकरं रास्ते पर धूंडणे लगे l उन्होंने सोचा की शहरी लडका है l जायेगा कहा कही रस्ते मे मिल जायेगा l और वह इधर उधर धुंडते रहे l

इधर सौमित्र जंगली ईलाके से जंगली प्राणीयो से बचते हुवे वह एक नदी के तट पर पहुंच गया l उसे बहुत प्यास लगी थी l उसने नदी के पानी को निहारा l फिर थोडासा पानी पिया l और उसने नदी के प्रवाह को जाच नदी मे पानी कम था l तो उसने नदी के रास्ते जाणे का सोचा, ताकी वह लोग ढुंड न पाये l और एक नदी मे बहकर आई हुई एक लकडी ली l और नदीके रस्ते वह चल पडा l रास्ते मे नदी के किनारे मिलने वाले पेडों को निहारकर उसके पत्ते , मोहर खाकर वह आगे चलता गया l थोडी देर में उसे आगे चलते हुवे एक पूल लगा l वह एक बडे राहते का पूल था l वह उस राहते के किनारे से आगे की गावं तक पहुंचा गया l इतना चलकर भी उसे थकान नही लगी थी l क्यो की उसके दादाजी उसे हर दिन दौड लगवाते थे l

थोडीही देर में वहा से एक बस गुजर रही थी l वह बस के पीछे भागकर पीछे की सिडी पकडकर उसके ऊपर चढ गया l

सिडी से ऊपर जाकर लगेज रखने वाले रॅकेट मे जाकर जगह बनाकर सो गया l वह बस मजल दरमजल करते हुवे नजदीक वाले शहर राजापूर चली गई l राजापूर स्थानक पहुंचते ही सौमित्र बस स्टॉप पर उतर गया l और उसने शहर के थाने के बारे मे पूछताज की, और वह थाने की तरफ चला गया l वहा पर जाकर उसने पुलिस को सारी हकिकत बयान की l उसके बाद थाने के आफिसर ने सौमित्र के शहर वाले थाने से संपर्क किया l सौमित्र के पिताजी रुपयों का इंतजाम कर रहे थे l इतने मे एक हवालदार उनके घर आया l और सौमित्र के बारे मे जाणकारी दे दी l सौमित्र के कहे अनुसार राजापूर पोलीस हरकत मे आये l जाच पडताल करके उन्होंने उन अपहरण कर्तावो को पकड लिया l पहले तो उन्होंने गुनाह कबुलने से इनकार किया l लेकीन जब पुलिसने खाकी रवय्या दिखाया l तो उन्होंने सब कबूल किया l पूछताज के बाद पता चला की यह सब कुछ उनके दुकान के कर्मचारी रजत शर्मा का किया धरा है l पुलिस ने रजत शर्मा को पकडकर उस पर कार्यवाही की l उसे जेल में डाल दिया l अपने नाती का साहस देखकर दादाजी को बडा संतोष हुवा l अनेक सेवा मंडल तथा संस्थांवोंने सौमित्र का सत्कार किया l तबसे सौमित्र किसी के भी ऊपर बिना परखे आंख मुंद कर भरोसा नहीं करता था l दादाजी के प्रती उसका आदर अब कूछ जादा ही बढ गया था l उस दिन के बाद वह कसरत, खेल कुद तथा अन्य उपकर्मो मे खुद ही शौक से सहभागी होणे लगा l और पढाई मे भी अव्वल आने लगा l अब दादाजी को यह लगता की सौमित्र भले ही फौज मे भरती हो या ना हो उसने अपने भविष्य के लिये अपना जीवन बिताने के लिये आवश्यक उपयुक्त शिक्षा ली है l वह अपने राह का एक कुशल, सशक्त ज्ञान से संपृक्त फौजी बना हुवा हैं l

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