७)पानी
लेखक: निशिकांत हारुगले.
महाराष्ट्र राज्य में पश्चीम घाट में अनेक गाव बसे हुवे है l यहा पर हरे भरे वादियों मे इतिहास की गाथा सुनाने वाले किल्ले पाये जाते हैl यहा पर पहाडी किल्ले के अआस पास बहुत सारे छोटे छोटे गावं पाये जाते है l महाराष्ट्र के दक्षिण मे स्थित एक जिल्हे मे एक किल्ला है l उसके आस पास छोटे छोटे से गावं बसे हुवे है l उन मे तीन गाव है l एक वनगाव, सोनगाव और तिसरा कडेगांव l वनगाव जो था वह किल्ले के नीचे बसा हुवा था l उसके नीच थोडी दूर पूरब की तरफ कडेगाव था l तो दुसरी तरफ पश्चिम की तरफ नीचे सोनगाव था l वनगाव के नीचे से एक नाला निकलकर सोनगाव और कडेगाव के बीच से होकर नदी की तरफ जाता था l बरसात के दिनो मे यह नाला इतना उफान पर होता की एक नदी के माफीक भाता l
लेकिन शिशिर तथा वसंत ऋतू तक वह पुरी तरह सुख जाता l और यहा के गाव में पानी की दिक्कत हो जाती l यहा के लोगो को काम जो मिलता जो भी बरसात के चार महिने मे, वह भी खेत से, उसके बाद यहा के लोग नजदीक वाले शहर, या पूना, मुंबई को जाते l जो भी काम मिले वह करते l और अपना गुजारा करते l और गावं मे रहते सिर्फ बुढे बुजुर्ग तथा स्कूल मे पढने वाले बच्चे और औरतें l शिशीर ऋतू के दौरान गाव के देवता की यात्रा आ जाती l और शहर गये रोजी रोटी कमाने के लिये लोग गावं की तरफ आते l
हर साल की तरह इस साल भी वनगाव की यात्रा थी l शहर गये जवान लडके गावं की तरफ आने लगे थे l जब यात्रा का दिन आया, गाव मे पानी की किल्लत होणे लगी थी l गाव के लोग यात्रा के दिन ही पानी के लिये इधर उधर भटकणे लगे l यात्रा के दिन आये बाहर से मेहमान यह सब देखकर छि थू करने लगे l एक मेहमान ने जवान लडको के सामने दो बाते सुनाई की कैसे लोग है यहाँ के l यहा पर पानी की किल्लत है l कैसे इस गावं मे लडकी ब्याह के देगा कौन? यह बाते जवान लडको को बहुत ही चुभ गई l यात्रा के दुसरे ही दिन गाव की पंचायत की सभा बुलाई गई l गाव के सरपंच को उन्होंने भली बुरी सुनाई l इस समस्या के बारे मे गाव सभा मे बहुत ही कही - सूनी हुई l सभा में सरपंच की बॉडी मे नियुक्त हुवा एक माधव नाई था l उसका नाम माधव नाई था l अपना पुरखों से चला आया हजामत का काम वह करता था l वह सभा मे उठ खडा हुवा l
“ क्यो की जो न जाणे कोई वह जाणे नाई l” ऐसी कहावत है l माधव नाई हजामत के कारण इधर उधर के गावं जाता था l उसका आना जना सोनगाव से लेकरं कडेगांव तक था l इस कारण बहुत से लोगो मे उसकी जान पेहचान होती थी l उसने उनके गावं के झरणे का पानी सोनगाव तथा कडेगांव के लोगो ने किस तरह चुराया वह सब कहाणी उसने बताई इतना ही नहीं उसका हल भी बताय l
उसने पहले सोनगाव के लोगो ने पानी कैसे चुराया वह बताया, उसने कहा “सोनगाव का एक शिक्षक किल्ले के नीचे वाले पहाडी पर बसे हुवे शिवपेठ नामक गावं मे पढाने के लिये जाता था l उसकी वहा पर सरकार ने नियुक्ती की थी l वह अपने गावं के पश्चिम छोर वाले रस्ते से जाता था l सोनगाव मे पानी की समस्या दूर करने के लिये उसने हमारे गावं की पश्चिमी छोर के झरणे का पानी पाईप डालकर ले जाणे का सुजाव दिया l सोनगाव के लोग जब नल डालने आये l तो उस पानी से खेती करने वाले गाववालोने उन्हे रोका l तब यह मामला सरकारी न्यायालय जा पहुंचा l तब यह मामला सुलजाने के हेतू तहसीलदार सोनगाव की तरफ से आया l तब तहसील दार ने कहा की झरणे के पास छोटा तालाब बनाया जाय l जिसमे से मिलने वाले पानी का एक हिस्सा सोनगाव को दिया जाय l और तीन हिस्सा पानी वनगाव के खेत वाले किसानों को दिया जाय l तब कूछ वनगाव के अडेलतट्टू किसनो ने अपने मुछोपर ताव मारते हुवे तहसील दार को कहा की पानी हमारे गाव की हद्द मे है l एक हिस्सा क्या मूछ का बाल उगाने जितना भी ना दे हम l तब सरकारी कोर्ट ने खेत से बढकर प्यास को महत्त्व देते हुवे सोनगाव को तीन हिस्सा पानी देने को कहा l और एक हिस्सा पानी खेत के लिये छोडने को कहा l लेकीन सोनगाव के चलाख लोगो ने नल डालते वक्त गेहरा खड्डा खुदवा दिया l ताकी किसान पानी न ले पाये l और उनका गावं नीचे होने के कारण उन्हे आसानी से पानी जा सका l
अब भी हमे पानी मिल सकता है l लेकीन वह पूरब की हद्द से , हमारे गाव से पुरब की तरफ एक नाला है उसके ऊपर एक झरणा है l उसका पानी कडेगांव के लोग सिमेंट का पाईप डालकर ले गये है l वहा पर पाईप भर के जाकर भी थोडासा पानी बेहता रहता है l वही सही हम पानी पा सकते है l लेकीन कडेगाव के लोगो से टकरायेगा कोण?”
तब सरपंच जी बोले, “ पहले हम गाव का नक्षा देखेंगे l की वह पानी किस गाव की हद्द मे है l कल फिर से सभा भरेगी l” ऐसा कहकर सभा बरखास्त हो गई l दुसरे दिन श्याम को फिर से सभा का आयोजन किया गया l
दुसरे दिन सरपंच और दो होशियार पढे लिखे गाववाले तहसील कार्यालय गये l वहा जाकर उन्होंने गाव का नक्षा देखा l नक्षे की प्रत मिल गई l तो उन्होंने गाव के ईलाके की जाणकारी इकठ्ठा कर ली l और गावं की सभा मे सब खुलासा किया l दोनो पानी के प्रवाह गाव के इलाकें मे थे l तो उस पानी पर गावं का हक था l भिड मे से एक लडका उठा l और बोला , “ हमारे गावं का पानी है l हमे चूप नहीं बैठणा है l गाव मे पानी लाकर ही रहेंगे l”
तब मधू नाई बोला, “ चूप कर लडके, गरम जोशीले खून का उबाल मत दिखा l पहला पानी गावं के नादान किसानो की वजह से सोनगाव को देना पडा l अब अकल से दिमाग थंडा करके काम चलाना है l जो की साप भी मरे और लाटी भी ना तुटे l”
फिर माधव नाई बोला, “ अब मै केहता हु l उस तरह तिन अर्जिया लिखी l एक सोनगाव के सरपंच को, दुजी कडेगांव के सरपंच को और तिसरी तहसील को l”
माधव नाई के कहे अनुसार अर्जीया लीखी गई l अर्जी मे लीखा गया था l की वनगाव मे पानी की किल्लत सुरु हो गई है l और पुरब तथा पश्चिम के झरने से हमे पानी दिया जाय l आर्जी पहुंच गई l अर्जी देणे वाले ने सोनगाव और कडेगांव के सरपंच को कहा की कल आप लोग वनगाव आकर इस समस्या का निवारण किजीये गा l अगर नहीं आये तो इसका अंजाम बुरा होगा l
दुसरे ही दिन दोन सरपंच वनगाव आ गये l काफी देर तक यह चर्चा चलती रही l दोनो ने हात खडे कर दिये l और पानी देणे के लिये एक दुसरे को कहने लगे l असल में समस्या यह थी की उनके गाव वालो ने उन को धमकी दी थी l की अगर पानी के बारे में हमें नुकसान हुवा l तो अगले चूनाव मे तुम्हे दिखा देंगे l इस कारण वह एक दुसरे से अपने स्कीम से पानी देने को कह रहे थे l वनगावं के लोग एक घंटे से यह तमाशा देख रहे थे l वनगाव के सरपंच ने कहा की ये चुहे बिल्ली का खेल बंद कर दो l पानी हमारा है l हम चाहें तो दोनो गाव का पानी बंद कर सकते है l हम सिर्फ पांच दिन की सहुलियत देते है l अगर पाच दिन मे यह निपटारा न हुवा तो तुम्हारे गाव की प्यास् कैसे बुझाते हो वो हम देखेंग l
नाही तुम लोगो को छटी का दूध याद दिलाया तो हम भी वनगाव के नहीं l तुकोबाजी का अभंग हमे भी याद है l चाहें दान मे पुरे कपडे भी देंगे l लेकीन बुरे लोगो पर हमारे दंडे बरसेंगे l अब चले जाव यहा से सिर्फ पाच दिन है तुम्हारे पास l” ऐसा कहने पर वे लोग चूप होकर चले गये l तिनो गाव मे एक ही चर्चा थी l की पानी का बटवारा कैसे होगा?
देखते ही देखते पाच दिन हो गये l छटे दिन एक गाववाले को कडेगांव और सोनगाव को भेजा गया l वह हात हिलाते आया l उसने कहा की दोनो गावं वाले मान नही रहे है l तब वन गावं का सरपंच आग बबुल हो गया l उसने अपने गाव की सरपंच बॉडी तथा गावं के जिम्मेदार लोगो से सलाह मशवरा किया l गाव के पंद्रह सोलह नौजवान इकट्ठा कीये l उन्हे रात को चावडी में बुलाया l दो गुट बना दिये गये l एक पुरब की तरफ तो दुसरा पश्चिम की तरफ भेज दिया l उनके हात मे कुदल ,फावडा , हातोडा ये अवजार दिये l वे गुट दो तरफ चले गये l पूरब की नाले की तरफ कडेगाव की सिमेंट की पाईप थी l उस गुट ने दो दनको मे ही उसका काम तमाम किया l और सभी पानी की लाईन उखाड फेकी l पानी के फवारे उडने लगे l पानी झरणें से बहकर नाले की तरफ जाणे लगा l
इधर पश्चीम दिशा की तरफ गया हुवा गुट पानी के नल के पास पहुंचा l उन्होंने पाईप तोडने की कोशिश सुरू की लेकीन वह बीड के धातू का बना था l कितने घाव डाले पर तुटणे का नाम हि नहीं ले रहा था l लडके तोडणे के लिये हिचकिचाने लगे l तब उनके साथ गया हुवा माधव नाई बोला, “ अरे कैसे मरगठ्ठे के लडके हो l देखो ए हमारी गावं की इज्जत का सवाल है l अगर ए नल नहीं तुटा तो हमारे गावं के लोग और गाय भैस् पानी पानी करके मरेंगे l देख क्या रहे हो ये लो गणू लुहार का हातोडा और तोड दो ये नल,”
बहुत प्रयास से भी वह नल टस से मस नहीं हो रहा था l तब माधव नाई बोला, “ अगर ये नल जो तोडेगा उसकी एक मास की हजामत मै बिना रुपये लिये करूंगा l और न तोडा तो एक एक की आधी मूछ मुंडवाके रहुंगा l ”
तब उन मे से एक युवक आगे आया l दिखने मे दुबला पतला लग रहा था l उसने हातोडा लिया l और नल के पास गया l और नल पर हातोडा चलाने लगा l
उस हतोडे की आवाज से आस पास का माहोल कंपित हो रहा था l रात के अंधेरे मे उन युवको को भारी जोश आया था l उन्होंने बारी बारी जाकर उस नल पर घाव डाले l देखते ही देखते नल तूट गया l पानी झरणे मे जाने लगा l उसके बाद वे लोग गाव आ गये l नल तुटणे के कारण उन दोनो गावों का जलपुरवठा खंडित हुवा l जब देखने गये तो नल तुटे पाये l दोनो गावों ने वनगाव के लोगो के खिलाफ शिकायत दर्ज की l दुसरे दिन देखने के लिये पुलिस आने वाले थे l तब वनावनात के लोगो को जब यह खबर मिली तो सरपंच बोले, “पुलिस लेकरं आणेवाले है क्या? अब देखते है क्या करती है पुलिस?, कोई आदमी नही जायेगा उधर सभी औरतो को बाहर निकालो l आज चुला बंद पानी की लढाई होगी l गाव की महिला को चावडी पर इकट्ठा किया गया l उनके दो गुट बना दिये गये l और दोनो तरफ भेजां l उनमे कूछ झगडालू थी l पुलिस और उन गाव के लोगो के आने से पहले वनगाव की औरते नल के पास जाकर बैठ गई l जब पुलिस को लेकरं कडेगांव के लोग आये l तब औरतों को देखकर वे लोग आगे आने से कचरणे लगे l तब कडेगांव का एक आदमी बोला, “ अरे, वो वनगाव की चुडेलो तुम्हारे आदमी चूहे के माफीक घर में दुबक कर बैठे हुवे है क्या? जो तुम आई हो पानी चूराने l”
तब वन गावं की सरपंच की बिवी बोली, “ अरे, वो मेंढक किसे पानी चोर केह रहा है l चांद, सूरज और धरती मां जाणे पानी किसका है l हमारी गावं की सरहद मे है, यह पानी, चुराके ले गये तुम और हमे चोर केहते हो l ये तो उलटा चोर कोतवाल को डाटे l”
दुसरा आदमी बोला, “ तोहरी जबान तो कैची की तरह चलती है l काट के फेक देंगे l चूप चाप यहा से चली जावो l वरना पत्थर मारके भगा देंगे l
तब वनगाव की सभी औरते बोली देखते है l कोण भगाता है किसे l उन मे से एक बोली, “चौथी कक्षा मे हमने भी पढाई की है l की मावलो ने किस तरह पावनखिंड लढी थी l और हम तो पहाडी शेरनी है l चलो उठवो पत्थर धावा बोल दो l”
उन्होंने जोर से पथ्थर फेकणे सुरु किये l जैसे पथ्थर लगणे लगे l कडेगांव के लोग और वे पुलिस इधर उधर भागणे लगे l चढण उतरण के रास्ते भागते हुवे वो हाफने लगे l उनकी सास फुलणे लगी l उनकी हालत देखकर वनगाव की औरते हसणे लगी l तब एक पुलिस दुसरे से बोला, “ अबे खा बिर्याणी , वडा पाव, देख कैसी हालत हुई हमारी”
दुसरा पुलिस वाला, “ छोडुंगा नहीं इनको, ठाणेन में बंद कर दूंगा l”
पहला पुलिसवाला, “ किस किस को ठाणे मे बंद करवायेगा l पुरे गावं की औरते थी l और हमे सिर्फ देखने का नाटक करना था l असल में यह पानी वनगावं का ही है l"
दुसरा पुलिसवाला, “ अरे, वो ठीक है l लेकीन पुलिस पर हात उठाना जुरुम है l कायदा कानुन कूछ है क्या नहीं l”
पहला पुलिस वाला, “ कैसा कायदा कानुन पहले तो हमने ही गलत किया है l इन कडेगाव और सोनगाव की बातों मे आकर l इनकी शिकायत न सुनकर दी हुई बिर्याणी खाकर आग ये रोक झाडणे, तो क्या दुसरे चूप बेठेंगे l देख में तो कोई शिकायत न करूंगा l और तुम भी मत करना l वरना l”
दुसरा पुलिस वाला, “ वरना क्या होगा l”
पहला पुलिस वाला, “ मेरा घर में हुक्का पानी बंद होगा l क्यो की मेरी बिबी वनगाव की है l उसने मुझे धमकी दि है l की अगर वनगाव वालो के साथ कूछ गलत सलत किया तो घर मे आना बंद करवा देगी l”
दुसरा पुलिस वाला बोला, “ अरे, बापरे यह बात है l इसलीय तुम इधर आने से मना कर रहे थे l चलो तो फिर सुलाह करते है l”
दोनो ठाणे चले गयेl जाकर सब बाते ठाणेदार से की, तब ठाणेदार उलटा गुस्सा होकर एक पुलिस की तुकडी लेकरं वनगावं चला गया l लेकीन तब पुरा गावं पुलिस के साथ लढणे झगडणे के लिये तयार था l तंग वातावरण देखकार ठाणेदार ने शांती से पुरा जायजा लिया l और शांती से बातचीत करने हेतू पूरी घटना जाकर तहसीलदार को दे दी l
दुसरे दिन तहसीलदार ने तीनो गावं की सरपंच तथा अन्य सदस्य को बातचीत करने के लिये बुलाया l कडेगांव तथा सोनगाव के सरपंच पानी देने को राजी हुवे l तब तहसीलदार बोले की वन गाव को थोडा पानी देना चाहिए l वे चाहें तो छोटासा नल डालकर भी ले जा सकते है l तब वनगाव का सरपंच बोला की साहेब आप भी बिर्याणी खाकर बोल रहे है क्या? पानी का बटवारा हम करेंगे l हमारा पानी है l आप कोण होते है l इस झरनों के मालिक l
तब उसने कहा की सोनगाव की तरफ के पानी के तीन हिस्से होंगे l पहला वनगावं दुसरा सोनगाव और तिसरा जंगली जानवरो के लिये l और उसी तरह कडेगांव की तरफ के पानी का भी होगा l उसके लिये वहा पर एक छोटीशी टंकी बनाकर यह बटवारा होगा l कल से हम नल खुदाई का काम चालु करेंगे l
दुसरे दिन से ही गाववालो को लेकर वनगावं के लोग काम करणे लगे l कूछ दिनो में उन्होंने नल का काम पुरा किया l और गावं मे पानी आया l तहसीलदार ने भी इस योजना को मान्यता दे दी l और इस तरह पानी का बटवारा हो गया l और इस प्रकरण पर पडदा पड गया l












